एसपी टीकमगढ़ न्यायालय में तलब निष्पक्ष विवेचना और साक्ष्य को छुपाने के कारण कोर्ट ने दिया नोटिस

टीकमगढ़। जिला एवं सत्र न्यायालय टीकमगढ़ से एक खबर सामने आ रही है जो टीकमगढ़ के पुलिस तंत्र को फिर एक बार कटघरे में खड़ी करती है। बीते कुछ समय में जिस प्रकार से टीकमगढ़ जिले में आपराधिक वारदाते बड़ी है वो किसी से छुपी नहीं है। लेकिन इसके बाद भी टीकमगढ़ पुलिस अधीक्षक के द्वारा एक बार भी टीकमगढ़ जिले में बढ़ते अपराध के संबंध में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है। एक मामला जिला न्यायालय से सामने आ रहा है जहां मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री प्रियंक दुबे की कोर्ट ने टीकमगढ़ पुलिस अधीक्षक मनोहर सिंह मंडलोई समेत छः अन्य पुलिस अधिकारियों जिसमें पूर्व एएसपी सीताराम सत्या, वर्तमान एसडीओपी राहुल कटरे, पूर्व थाना प्रभारी आनंद राज, पंकज शर्मा, एसआई कमल विक्रम पाठक, एएसआई उदय राज गोंड को न्यायालय में नोटिस के माध्यम से तलब किया है और आवेदक अमिताभ जैन द्वारा दायर परिवाद में अपना पक्ष रखने को कहा है। जिसमें सूत्रों के अनुसार एसडीओपी राहुल कटरे और एएसआई उदय राज गोंड उपस्थित हो चुके है जबकि अन्य लोगों की अगली पेशी पर उपस्थित होने की संभावना है। पूरा मामला तथ्यों के साथ हेर फेर करने, फर्जी एफआईआर लिखने, मनमर्जी से विवेचना करने और साक्ष्यों को छुपाने से संबंधित है। इस परिवाद को जिले के समाजसेवी अमिताभ जैन के द्वारा लॉ फर्म जेपी एसोसिएट्स के माध्यम से न्यायालय में लगाया था जिसपर न्यायालय द्वारा गंभीरता से कार्यवाही करते हुए प्रस्तावित आरोपियों को न्यायालय में तलब किया है। जेपी एसोसिएट्स के पार्टनर अधिवक्ता अविरल जैन ने बताया कि पहले तो पुलिस द्वारा एक मनगढ़ंत एफआईआर लेख की गई, उसके बाद जब मेरे पक्षकार ने साक्ष्य अपने बेगुनाही के साक्ष्य पुलिस को दिए तो उनको विवेचना का हिस्सा नहीं बनाया और जबरदस्ती न्यायालय में चालान पेश कर दिया जिसके बाद हमने उक्त चालान और एफआईआर को माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में चैलेंज किया जहां से उच्च न्यायालय द्वारा चालान और एफआईआर पर स्टे दे दिया गया जिसके बाद निष्पक्ष विवेचना न करने, साक्ष्यों को न्यायालय से छुपाकर, राजनैतिक दबाव में चालान पेश करने के कारण परिवाद पेश किया था जिसपर कोर्ट ने कार्यवाही करते हुए सभी प्रस्तावित आरोपियों को तलब किया है। श्री जैन का कहना है कि कानून का शासन है कोई भी कानून से बड़ा नहीं है चाहे वह राजनेता हो या कोई भी अधिकारी। जेपी एसोसिएट के पार्टनर अधिवक्ता आशुतोष का कहना है कि निष्पक्ष विवेचना न करना अन्याय तो है ही साथ ही साथ न्यायालय के समय की बर्बादी करना भी है। जब सारा मामला वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में था तब भी ऐसी कार्यवाही करना सोच का विषय है। अमिताभ जैन का कहना है कि मुझे न्यायालय पर पूरा भरोसा है, जहां पर न्याय अवश्य होगा।

मनीष सोनी की रिपोर्ट

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *