पुलिस स्लोगन को ताक पर रखने बाले गुस्सैल एसआई के बिरुद्ध ज्ञापन

टीकमगढ़। मध्यप्रदेश पुलिस का कागजो मे व्याप्त स्लोगन “देशभक्ति और जनसेवा” मे से जनसेवा की धज्जियाँ उड़ाने मे हमेशा आगे रहने बाले एसआई राजवीर सिँह का पुनः एक मामला सामने आया है जिसमें उन्होंने देश के चौथे स्तंभ पत्रकार से अभद्रता कर दी। हालांकि ये गुस्सैल व्यवहार इनकी आदत बनती जा रही है।थाना कोतवाली में पदस्थ उप निरीक्षक (एस.आई.) राजवीर सिंह द्वारा पत्रकारों के साथ अभद्रता करने एवं समाचार कवरेज में बार-बार बाधा उत्पन्न किए जाने के आरोपों को लेकर पत्रकारों में रोष व्याप्त है।इन्हीं आरोपों के विरोध में जिले के पत्रकारों ने एकजुटता दिखाते हुए पुलिस अधीक्षक, उप पुलिस महानिरीक्षक एवं पुलिस महानिरीक्षक के नाम एक संयुक्त ज्ञापन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को सौंपा।ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि कवरेज के दौरान पत्रकारों के साथ अनुचित व्यवहार किया जाता है, मोबाइल कैमरा बंद कराने का दबाव बनाया जाता है तथा लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के कार्य में अवरोध उत्पन्न किया जा रहा है। ऐसा ही बीते दिन बुधवार को शाम करीब 5:50 पर हुआ जब एक मारपीट मामले में पत्रकार समाचार कवरेज कर रहा था। इसी दौरान एस.आई. राजवीर द्वारा एक पत्रकार का मोबाइल कैमरा जबरन बंद कराते हुए अभद्र भाषा का प्रयोग कर यह कहा गया कि “घर ले जाकर वीडियो बनाओ, थाने में वीडियो नहीं बना सकते।” यह व्यवहार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के अधिकारों का खुला हनन है। इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताया।पत्रकारों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में पत्रकारों को निर्भय होकर अपने कर्तव्य का पालन करने में किसी प्रकार की बाधा न हो। *पूर्व में हो चुका गाली गलौज का ऑडियो वायरल* वही हम आपको बता दे कि पूर्व में एक अन्य मामले को लेकर भी गलीगलोज कर एक व्यक्ति को कोतवाली बुलाये जाने का भी ऑडियो वायरल हुआ था। सूत्र की माने तो यह ऑडियो एस.आई राजवीर का था जिनके द्वारा गालीगलोज की जा रही थी। फिल्हाल यह ऑडियो वायरल ऑडियो था। जिसकी पुष्टि नहीं की जा सकती लेकिन मामले में वरिष्ठ अधिकारीयों को जांच जरूर करना चाहिए थी। क्योंकि ऐसे में खाकी सहित जिले के कप्तान (पुलिस अधीक्षक) की छवि पर पर भी असर पड़ रहा है। सभी ने आज गुरुवार की दोपहर करीब 2 बजे आसपास अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने ज्ञापन दिया और मामले पर उचित कार्रवाई की मांग के साथ सम्बन्धित थाना प्रभारीयो और अधिकारी कर्मचारियों को आवश्यक दिशा निर्देश देने मांग की है दिया है।बॉक्स *मामले में क्या कहते है वरिष्ठ अधिकारी* पत्रकारों के साथ कवरेज के दौरान मोबाइल कैमरा छीनने का मामला समस्त पत्रकारों द्वारा लिखित रूप से ज्ञापन दिया गया है। टीकमगढ़ द्वारा विधिवत जांच कराई जाएगी और जांच में जो तत्व आएंगे उसे हिसाब से कार्यवाही की जाएगी क्योंकि पूर्व में भी यह तथ्य संज्ञान में लाया गया था। इसमें विधिवत हिदायत दी गई थी। लेकिन यह जो घटनाक्रम है इसकी विधिवत जांच कराई जाएगी एक सप्ताह में एसडीओपी जांच करेंगे।अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विक्रम सिंह 2 बॉक्स *थाने में पत्रकारों के कवरेज से जुड़े नियम* 1 कवरेज पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं2 भारत के कानून में ऐसा कोई नियम नहीं है जो पत्रकारों को थाने में कवरेज करने से पूरी तरह रोकता हो।3 पत्रकार सार्वजनिक हित से जुड़ी जानकारी जुटा सकता है।4 अभद्रता या जबरदस्ती गलत तरीके से पत्रकार का मोबाइल पकड़ना, कैमरा बंद कराना, अपमानजनक शब्द कहना कानूनन गलत है।5 सुप्रीम कोर्ट व प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने माना है प्रेस की स्वतंत्रता लोकतंत्र का मूल आधार है। *अंदरूनी/संवेदनशील स्थान कवरेज दौरान* यदि पुलिस कवरेज रोकती है, तो उसके पीछे स्पष्ट कारण और लिखित/कानूनी आदेश होना चाहिए, न कि मौखिक धमकी।मालखाना, लॉकअप, केस डायरी, बयान दर्ज करने का समय—इन जगहों पर बिना अनुमति रिकॉर्डिंग रोकी जा सकती है, लेकिन इसका तरीका शालीन और कानूनसम्मत होना चाहिए।

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