अस्तित्व के लिए संघर्ष करता सैल सागर तालाब

टीकमगढ़। टीकमगढ़ नगर की समाज सेवी संस्थान अविरल फाउंडेशन ने फिर एक बार जन कल्याण का मुद्दा उठाया है। टीकमगढ़ नगरबके हृदय में स्थित सैल सागर तालाब किसी समय में आम जनमानस की प्यास बुझाने का साधन था लेकिन अब बही सैल सागर तालाब किसी बड़े षडयंत्र की भेंट चढ़ता जा रहा है। टीकमगढ़ की रानी के द्वारा अपने शासन काल में सैल सागर तालाब को बनवाया था। इतिहासकारों की माने तो सैल सागर तालाब का नाम माता पार्वती के दूसरे नाम जिन्हें हिन्दू धर्म में सैल पुत्री भी कहा जाता है जिसकी नवरात्रि के प्रथम दिन पूजा की जाती है उन पर से रखा गया था इसलिए सैल सागर तालाब के चारों तरफ हिन्दू मंदिर भी बने हुए है। लेकिन वर्तमान में सैल सागर तालाब अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है। सैल सागर तालाब की एक तरफ की बधान टूटी हुई है जिसकारण से सैल सागर तालाब में पानी भर ही नहीं पता है। ऐसा नहीं है कि ये बधान हमेशा से टूटी थी। लेकिन कुछ वर्ष पूर्व ये बधान टूट है। इस बधान के टूटने से बारिश के मौसम में सैल सागर तालाब के पास बसी अवैध कॉलोनी में बने घरों में जल भराव की गंभीर समस्या का भी सामना करना पड़ता है। कुछ वर्ष पूर्व यही पानी टीकमगढ़ कलेक्टर के बंगले में घुस गया था। इस वर्ष भी सैल सागर तालाब का ओवरफ्लो पानी के कारण ही टीकमगढ़ की अधिकांश कॉलोनी में जल भराव हुआ था। अब सवाल है कि सैल सागर तालाब की बधान जो वर्षों से नहीं टूटी थी अचानक से कैसे क्षतिग्रस्त हो गई। क्या किसी ने षडयंत्र पूर्वक इसे क्षतिग्रस्त किया है? अविरल फाउंडेशन के अध्यक्ष अमिताभ जैन ने कलेक्टर टीकमगढ़ को पत्र सौंप कर सैल सागर की क्षतिग्रस्त बधान को पुनः निर्माण कराने की मांग की है। अध्यक्ष अमिताभ जैन का कहना है कि उक्त बधान के टूटने से सैल सागर तालाब अपना अस्तित्व खोदेगा। बधान क्षतिग्रस्त कैसे हुई इस पर जांच होनी चाहिए लेकिन सबसे पहले उस टूटी हुई बधान को ठीक करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। ताजी अगर कोई षडयंत्र कर भी रहा हो तो अपने मंसूबों में वह कामयाब न हो सके और सैल सागर तालाब का अस्तित्व बचाया जा सके।

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