मनमाने टेंडरों से ठेकेदारों को फायदाजनता को जलभराव की सौगात – नियमों की उड़ रही धज्जियां

टीकमगढ़। जिले में नगर पालिका टीकमगढ़ के अंतर्गत विकास कार्यों की आड़ में अब नियमों का खुला उल्लंघन और मनमानी टेंडर प्रक्रिया सामने आ रही है। विकास के नाम पर उन वार्डों में सीसी सड़क बनाई जा रही है, जहां पहले से ही पक्की और सुचारु सड़कें मौजूद हैं। वहीं जिन क्षेत्रों में सड़क निर्माण की अत्यधिक आवश्यकता है, वहां कोई सुनवाई नहीं हो रही है। ताजा मामला वार्ड क्रमांक 3, जड़िया मार्ग का है, जहां पहले से बनी हुई सड़क पर ही दोबारा सीसी रोड का निर्माण किया जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह सड़क पहले से ही दुरुस्त और अच्छी स्थिति में है। यहां नए टेंडर की कोई आवश्यकता नहीं थी, लेकिन ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत से टेंडर स्वीकृत हुआ और कार्य शुरू भी कर दिया गया — बिना जनसुनवाई और पारदर्शिता के।

नियमों का उल्लंघन: पुराने सीसी पर नई सीसी डलना गलत
नगर निगम और पीडब्ल्यूडी के नियमों के अनुसार यदि किसी पुराने सीसी मार्ग को नया बनाया जाना है, तो पहले पुरानी सीसी को पूरी तरह से उखाड़ना आवश्यक होता है। बिना पुराने कंक्रीट को हटाए उस पर सीधा नई सीसी डालना तकनीकी रूप से अनुचित और नियमों के विरुद्ध है। इससे न सिर्फ सड़क की उम्र घटती है, बल्कि नई सड़क में क्रैक (दरारें) पड़ने की संभावना भी बढ़ जाती है। साथ ही यदि सड़क ऊंची हो जाती है, तो घर नीचे और सड़क ऊपर होने से जलभराव जैसी समस्याएं सामने आती हैं।

कौन जिम्मेदार – ठेकेदार, इंजीनियर या नगर पालिका?
इस पूरे मामले में अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या अधिकारियों और ठेकेदारों की आपसी मिलीभगत से ऐसे क्षेत्र चुने जा रहे हैं, जहां निर्माण सामग्री कम लगे, और मुनाफा ज्यादा हो? विकास कार्यों में पारदर्शिता की जगह यदि निजी स्वार्थ हावी हो जाए तो न केवल सरकारी धन का दुरुपयोग होता है बल्कि जनता को भी भारी असुविधा झेलनी पड़ती है।

जनता की चिंता, जिम्मेदारों की चुप्पी
स्थानीय रहवासियों का कहना है कि उन्हें यह भी नहीं पता चला कि कब इस सड़क का टेंडर हुआ और किस एजेंसी को यह ठेका मिला। जब उनसे पूछा गया कि क्या सड़क की कोई जरूरत थी, तो जवाब मिला कि “यहां तो पहले से ही सड़क अच्छी थी, समस्या कहीं और है। शहर के आंबेडकर चौक से लेकर नए बस स्टैंड तक की सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे हैं जो आए दिन दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं, पर वहां कोई काम नहीं हो रहा।

उपयंत्री ने कहा काम रुक गया पर धरातल पर कार्य धड़ल्ले से जारी
सब इंजिनियर विजय सोनी के अनुसार काम बंद करबाया गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक काम चालू था, क्या सब इंजिनियर की नहीं सुनी ठेकेदार ने? जब उक्त मामले में नगर पालिका के सब इंजिनियर से बात हुई तो उन्होंने कहा की सीसी पर सीसी डाला जा सकता हैं और साथ में कहा की काम रुकवा दिया गया हैं। लेकिन जब हमारी टीम मौके पर दोबारा पहुंची तो कार्य सुचारु रूप से चल रहा था तो क्या ठेकेदार ने सब इंजिनियर की बात नहीं मानी क्या सेटिंग तगडी हैं। अब सवाल यह खड़ा होता हैं, काम सही हैं तो रुकवाने के लिए क्यों कहा क्या पूर्व में निरिक्षण नहीं किया गया था। अगर निरिक्षण किया गया था तो काम क्यों रुकवाने बात कही गई, जबकि जानकारी अनुसार सीसी सकड़ पर सीसी सड़क करने से नुकसान होता हैं। यह सब देखकर तो यह लगता हैं की यह परिषद की मिलीभगत से हो रहा हैं। अब यह एक जाँच का विषय बना हुआ हैं।

मनीष सोनी की रिपोर्ट

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