टीकमगढ़// ख्यातिप्राप्त साहित्यकार व इतिहासकार देहदानी पं.हरिविष्णु अवस्थी जी के देवलोक गमन पर नगर की साहित्यिक संस्थाओं के कवियों व साहित्यकारों ने नगर भवन के प्रथम तल पर एक शोकसभा आयोजित करके उन्हें अपनी भांवभीगी श्रृद्धांजलि अर्पित की जिसमें प्रमुख रूप से पं.कौशल किशोर भट्ट, राजेन्द्र पस्तोर, अशोक गोइल, हाजी ज़फ़रउल्ला खां ‘ज़फ़र’ राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’, रामगोपाल रैकवार, विजय मेहरा, प्रभुदयाल श्रीवास्तव,मीरा खरे,रश्मि गोइल,उमा पाराशर,रजनी जैसवाल, शीलचन्द्र जैन, डाॅ. सुमित जैन,डाॅ. महेन्द्र उपाध्याय,उमाशंकर मिश्रा, रविन्द्र यादव,अजीत श्रीवास्तव, रामस्वरूप दीक्षित,संदीप श्रीवास्तव, चाँद मोहम्मद आखिर’, वीरेन्द्र चंसौरिया,अनवर खान, शकील खान,वफा शैदा, प्रमोद गुप्ता,डी.पी.यादव, गुलाब सिंह ह यादव, पूरनचन्द गुप्ता,डाॅ. नरेन्द्र मोहन अवस्थी,एस.आर.सरल,रामबाबू वर्मा, मनोज लोधी,सुनील जैन,योगेश्वर पाराशर आदि रहे।
शोक सभा में कौशल किशोर भट्ट ने कहा कि बाबू जी बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे उन्हें साहित्य, इतिहास एवं पुरातत्व के बारे में बहुत जानकारी थी।
राजेन्द्र पस्तोर ने कहा कि अवस्थी जी ने देहदान का निर्णय लेकर स्वयं को पुनःजीवित कर दिया है मेडिकल कालेज दतिया के छात्र केा अध्ययन करने में बहुत मदद मिलेगी।
डाॅ. महेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि वे एक आदर्श शिक्षक के साथ-साथ एक श्रेष्ठ साहित्यकार एवं मिलनसार व्यक्ति थे सभी से बहुत ही प्रेम से मिलते थे।
म.प्र.लेखक संघ जिला इकाई टीकमगढ़ राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने बताया कि वे मुझे अपना दायाँ हाथ मानते थे और मैंने ही उनके अधिकांश आलेख एवं पुस्तकें कप्यूटर पर टाइप करके तैयार करता था वे मेरे साथ ही बाइक में बैठकर गोष्ठियों में जाया करते थे।
रामगोपाल रैकवार ने बताया कि उन्हें इतिहास के बारे में बहुत जानकारी थी बुन्देलखण्ड एवं खास टीकमगढ़ के पुरातत्व एवं इतिहास की बहुत गहन जानकारी थी उनकी पुस्तक ‘बुन्देलखण्ड के शिलालेख’ एवं बुन्देलखण्ड का जल प्रबंधन’ काफी चर्चित रही
श्री वीरन्द्र केशव साहित्य परिषद् टीकमगढ़ केे वर्तमान अध्यक्ष विजय मेहरा ने बताया कि वे सभी आगे बढ़ाने में मदद करते थे उनके पास अनेक शोधार्थी आते थे जिन्हें वे सहज ही पुस्तकें उपलब्ध करा देते थे।
अशोक गोइल ने कहा कि अवस्थी जी एक श्रेष्ठ संपादक भी थे उन्होंने अनेक अभिनंदन ग्रंथों का संपादन किया था। उनके ‘समग्र बुन्देलखण्ड’ एवं ‘महक माटी की’, अभिनंदन ग्रंथ बहुत चर्चित रहे।
रामस्वरूप दीक्षित ने कहा कि अवस्थी जी एक श्रेष्ठ लेखक थे उनकी पुस्तकें एक संदर्भ ग्रंथ के रूप में बहुत काम जायेगी।
शीलचन्द्र जैन ने कहा कि महाराज किताबों का बहुत अध्ययन करते थे फिर लिखते थे।
वीरेन्द्र चंसोरिया ने बताया कि उन्होंने अपने प्रारंभ में एक आदर्श शिक्षक के रूप में अपनी पहचान बनायी थी।
-राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’,टीकमगढ़
