इन दिनों भारतीय जनता पार्टी के नेता अमिताभ जैन को पार्टी से निष्काशित करने का पत्र सोशल मीडिया और मीडिया में वायरल हुआ था जिसपर से कुछ अखबारों द्वारा उसकी खबर छापी गई थी। पत्र निकलने के चार दिन बाद दिनांक 09/07/25 को अमिताभ जैन के द्वारा एक पत्र भाजपा जिला अध्यक्ष सरोज राजपूत को संबोधित करते हुए लेख किया है कि उक्त वायरल हो रहे पत्र के संबंध में स्पष्टीकरण दे। जैन ने पत्र में लेख किया है कि भारतीय जनता पार्टी के संविधान के नियम 25 के अंतर्गत जिला अध्यक्ष को किसी भी सदस्य को पार्टी से निष्काशित करने का अधिकार नहीं है। अनुशासनात्मक कार्यवाही करते हुए यह अधिकार केवल राष्ट्रीय अध्यक्ष या प्रदेश अध्यक्ष को है। साथ ही साथ अगर किसी कार्यकर्ता को निष्काशित करना भी हो तो उसको पहले कारण बताओ नोटिस देना अनिवार्य है। जैन ने कहा कि उनको वायरल हों रहा पत्र कभी भी औपचारिक माध्यम से प्राप्त नहीं हुआ है। साथ ही साथ दैनिक भास्कर में छपे ब्यान के आधार अगर जिला अध्यक्ष द्वारा स्पष्टीकरण नहीं दिया जाता है तो मानहानि का मुकदमा न्यायालय में करना पड़ेगा। उक्त संबंध में जैन ने जिला अध्यक्ष को दो दिन में स्पष्टीकरण देने के लिए लेख किया है। जैन ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ता आधारित पार्टी है। किसी भी पदाधिकारी की व्यक्तिगत द्वेषभावना के कारण निष्काषन नहीं होता है। पार्टी का हर कार्यकर्ता हर वर्ष अपनी सदस्यता शुल्क जमा करता है इसलिए ये अधिकार केवल प्रदेश एवं राष्ट्रीय नेतृत्व के पास है। साधारण रूप से व्यक्तिगत द्वेष के कारण किसी कार्यकर्ता के साथ अन्याय न हो इसलिए इस प्रकार के नियम पार्टी द्वारा दूरदर्शिता देखते हुए बनाए गए है।
मनीष सोनी की रिपोर्ट
